Tuesday, October 30, 2018

प्राचीन भारत का इतिहास

जय माँ सरस्वती 

नमस्कार  मित्रो,

में मनीष सोलंकी , दोस्तों में आपके लिए सम्पूर्ण भारत का  इतिहास के  महत्वपूर्ण  G.K.(भाग - A ) लेकर आया हु!

भारत का इतिहास

  1. प्राचीन भारत का इतिहास 
  2. मध्यकालीन भारत का इतिहास 
  3. आधुनिक भारत का इतिहास 
  • संयुक्त राष्ट्र संघ 
  • विस्व इतिहास से सम्बन्धित प्रमुख घटनाये 

(PART- 1)

प्राचीन भारत का इतिहास 

सिंधुघाटी सभ्यता 

पहला अध्याय :-  सिंधु घाटी सभ्यता / हड़प्पा सभ्यता 
  • सिंधु घाटी सभ्यता का समय ( कार्बन -14 ) के अनुसार - 2350 -1750 ई। 
  • सिंधु घाटी सभ्यता सिंधु नदी व् उसकी सहायक नदियों के पास में हुुुई थी इसलिए इसे सिंधु घाटी सभ्यता कहते है। 
  • सिंधु घाटी सभ्यता का सर्व प्रथम खोजा गया स्थल '' हड़प्पा सभ्यता '' भी कहा जाता है। 
सिंधु घाटी सभ्यता का विस्तार 
 उत्तर में - माढ़ा (J.&K.) से दक्षिण में दैमाबाद (महाराष्ट्र ) तथा पूर्व में आलमगीर (U P ) से पश्चिम में सुत्कांगेडूर (बलुचिस्थान ,पाकीस्थान ) तक।




  • IMP. -  
  • सिंधु घाटी सभ्यता का खोजा गया पहला स्थान '' हड़प्पाा'' था जो वर्तमान में पकिस्तान में है।
  • हड़प्पा के उत्खननकर्ता/ खोजकर्ता -दयाराम साहनी ने 1921 /22 में की।  
  • सिंधु घाटी /हड़प्पा सभ्यता में मिली सरंचनाओं/ स्थानों  में सबसे बड़ी सरंचना - अन्नागार है। 
  • मोहन जोदड़ो  - वर्तमान में पाकिस्तान में स्तिथ है  जिसका शाब्दिक अर्थ -मृतको का टीला है।  
          ⤷ खोजकर्ता - राखलदास बनर्जी -1921 /22 के आसपास 
          ⤷ मोहनजोदड़ो से पक्की इटे , सड़के, नालिया व् काँसिया की बानी हुई नर्तकी की मूर्ति प्राप्त हुई है। 
  • चुनहदडो - वर्तमान में पाकिस्तान में स्तिथ है, यहां से मनके (मोती) निर्माण के प्रमाण मिले है , ये मोती "जेस्सफॅर क्वार्ट्ज़ (लाल रंग) , चमकीले पत्थर आदि छोटे छोटे चमकीले पत्थरो से बनाये जाते है।  
  • सोर्तुघई  - अफगानिस्तान में स्तिथ है।  
           ⤷ यहां से नहरों के अवशेस मिले है।  
  • कालिबंघा - हनुमानगढ़ (राज.) में स्तिथ है।  
           ⤷ कालीबंगा की खोज के लिए सर्वप्रथम प्रयास -" अमलानंद घोष " द्वारा।
           ⤷ कालीबंघा  के उत्खननकर्ता - B.K. LAL ( BRAJ KUMAR LAL) AND  B.K. THAPER                              ( BAL KRISNA THAAPER)
           कालिबंघा में जुते हुए खेत के प्रमाण मिले है। 
  •   बनावली - हरियाणा में स्तिथ। 
           ⤷ यहां से हल के प्रतिरूप (मोडल) मिले है. 
  •  राखीगढ़ - हरियाणा में स्तिथ 
  • लोथल - गुजरात में स्तिथ। 

           ⤷  लोथल से बंदरगाह (गोदीबाड़ा ) के प्रमाण मिले है।

  • धोलावीरा - गुजरात में स्तिथ।  

           यहां से स्टेडियम मिला है।






井 सिंधुघाटी सभ्यता कांस्य युगीन सभ्यता थी।
     यह सभ्यता शहरी सभ्यता थी।

    ⤷  सिंधु वासियो की लिपि - चित्रात्मक थी जिसे अभी तक पढ़ा नहीं जा सका।

    ⤷  सिंधु समाज मातृसतात्मक था।   
   
    ⤷  सिंदुघाटी सभ्यता के लोग सर्वाहारी थे।
 
   ⤷  मेसापोटामिया (इराक) में मिला मेलुहा( मुहर ) सिंधुघाटी सभ्यता के लिए प्रयुक्त हुआ।



अध्याय 2   -      वैदिक सभ्यता 

(1500 ई.पू.- 600 ई.पू.)






  
वैदिक सभ्यता को 2 कालो में विभाजित किया है। 
  1. ऋग्वेद सभ्यता -(1500 ई.पू. - 1000 ई.पू. तक )
  2. उत्तरवैदिक सभ्यता- (1000ई.पू.- 600 ई.पू. तक ) 
वैदिक सभ्यता - आर्यो(सुद्ध) द्वारा निर्मित थी। 
  • आर्यो की भाषा संस्कृत थी। 
  • वैदिक सभ्यता ग्रामीण सभय्ता थी। 
  • वैदिक समाज वर्ण व्यवस्था में विभाजित था। 
  • ( वर्ण :- ब्राह्मण ,क्षत्रिय ,वेश्या , सूद्र ) में विभाजित था।  
  • वर्ण व्यवस्ता - ऋग्वेदिक कॉल में कर्म आधारित था , किन्तु उत्तर वैदिक काल में यह जन्म आधारित वंशानुगत हो गई।  


आर्यो का जीवन - आश्रम व्यवस्ता में विभाजित था
          ⤷ आश्रमब्रह्मचार्य आश्रम - जन्म से 25 वर्ष तक। 
          ⤷ गृहस्थ आश्रम 26 से 50 वर्ष तक।  
          वानप्रस्थ आश्रम - 51 से 95वर्ष तक. 
          सन्यास आश्रम - 96 से 100 वर्ष तक।

  •  आर्यो का परिवार - पितृसत्तात्मक था।  
IMP.:- 

  • वेदो की संख्या - 4 है। 
  • वेद का अर्थ - ज्ञान है - ये विद धातु से बना है 
  • वेदो को अपौरुषय  भी कहा जाता है।  

 1. ऋग्वेद :-  ऋग्वेद की रचना ऋग्वेदिक काल में हुई थी , यह वेद सबसे प्राचीन , नसबसे बड़ा वेद है जिसमे देवताओ की स्मृतियों का उललेख है और यह प्रकति पर निर्भर थी।  
 प्रसिद्ध गायत्री मंत्र - ऋग्वेद से लिया गया है। 
   
 2. यजुर्वेद :- यह वेद गघ एवं पघ दोनों शैलियों में है , इसमें यज्ञो का उल्लेख किया गया हैं।  
आर्यो द्वारा किये जाने वाले यज्ञ - 
  1. राजसूर्य यज्ञ -  राजा के राज्य अभिसेक के समय किया जाने वाला यज्ञ। 
  2. अश्व मेघ यज्ञ - यह यज्ञ राजा अपने साम्राज्य के विस्तार के लिए करते थे। 
  3. वाजपेय यज्ञ - गुड़ दौड़ प्रतियोगिता में विजय प्राप्त करने के लिए। 


3. सामवेद :-  सामवेद में आर्यो द्वारा गाई जाने वाली प्राथनाए एवं संगीत का उल्लेख मिलता है। 
4. अथर्ववेद :- इस वेद की रचना - अथर्वा ऋषि ने की थी।  इस वेद में आर्यो के दैनिक जीवन से जुडी बाते , रीती-रिवाज , अंधविस्वास जैसे - जादू टोना, टोटके,भूत प्रेत  आदि का उल्लेख मिलता है।  इस वेद में ओषधियों का उल्लेख भी मिलता है. 

  • वैदिक काल में षड्दर्शन (6) का विकास हुआ :-
                दर्शन                                   प्रणेता / प्रवर्तक 
  1. सांख्य दर्शन                                  महर्षि कपिल- सबसे प्राचीन दर्शन 
  2. न्याय दर्शन                                   महर्षि गौतम 
  3. योग दर्शन                                     महर्षि पतंजलि 
  4. वैशेषिक दर्शन                               कणाद 
  5. मीमांसा दर्शन                               जेमिनी 
  6. उत्तरी मीमांसा                             बादरायण 
  • ☆ उपनिषदों की संख्या - 108 है 
  • मुण्डकोपनिषद :-भारत के राष्ट्रीय चिन्ह पर अंकित सत्यमेव जयते मुंडकोपनिषद से लिया गया है। 
  • पुराणों की संख्या - 18 मानी जाती है। 
  • मत्स्य पुराण सबसे प्रमुख पुराण है। 
  • ब्राह्मणो के द्वारा लिखे गए ग्रन्थ - शथपथ ग्रन्थ, ऐतरेय ग्रन्थ , तेतिरेय ग्रन्थ , मनुस्मृति, याज्ञवल्क्य स्मृति।  
  • वेदो के ज्ञान को समझने के लिए वेदांगो की रचना की जिनकी संख्या - 16 मानी जाती है। 
  • संस्कारो की संख्या - 16 है 


COMING SOON ..:- महाजनपद काल    ⤵️⤵️

  • नन्द वंश 
  • मौर्य वंश 
  • गुप्त वंश 
  • ब्रह्मण साम्राज्य 

 धन्यवाद                      


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