जय माँ सरस्वती
नमस्कार प्यारे दोस्तो,
में मनीष , दोस्तों में आज आपके लिए PART-1 प्राचीन भारत का इतिहास का तीसरा अध्याय के महत्वपूर्ण G.K (भाग - B) लेके आया हु।
अध्याय 3. - महाजनपद काल
- ईशा के जन्म से पूर्व - 6 शताब्दी में सम्पूर्ण भारतवर्ष ''16'' महाजनपदो में विभक्त था, जिसकी जानकारी हमे बौद्ध ग्रन्थ - अंगुत्तर निकाय से मिलती है।
- दक्षिण भारत में विस्तृत मात्र एक महाजनपद - अश्मक था।
- मत्स्य महाजनपद - राजस्थान (जयपुर ) के आस पास के क्षेत्र में विस्तृत था।
- हर्यक वंश
- सिसुनाग वंश
- नन्द वंश
- मौर्य वंश
1. हर्यक वंश :-
- हर्यक वंश का संस्थापक - बिम्बिसार था , बिम्बिसार की हत्या उसके पुत्र - अजात शत्रु द्वार की गई।
- हर्यकवंश का अंतिम शासक - नागदसक था।
- NOTE- प्रथम बौद्ध संगीति का आयोजन - अजात शत्रु द्वारा
2. सिसुनागवंश :-
- सिसुनागवंश का संस्थापक - सिसुनाग था।
- कालाशोक - सिसुनागवंश से सम्बंधित था , जिन्होंने दृत्य बोद्ध संगीति का आयोजन करवाया था।
- सिसुनाग वंश का अंतिम शासक - नन्दिवर्धन था।
3. नंदवंश :-
- नन्द वंश का संस्थापक - महापद्म नन्द था।
- नन्द वंश का अंतिम शासक - धनानन्द था।
4. मौर्य वंश :- (322 ई. पू. से 185 ई. पू.)
- संस्थापक - चन्द्रगुप्त मौर्य
- चन्द्रगुप्त मौर्य के प्रधानमंत्री - कौटिल्य/ चाणक्य/विष्णुगुप्त
- चाणक्य -तक्षशिला विश्वविद्यालय में आचार्य थे। (तक्षशिला विश्वविद्यालय वर्तमान में -पाकिस्तान में है ) .
सिकंदर द्वारा भारत पर आक्रमण - 326 ई पू
⤷ हाइडेस्पीज का युद्ध / वितिस्था का युद्ध / झेलम युद्ध - सिकन्दर तथा पोरस के मध्य
⤷ पोरस पंजाब का राजा था।
- सेलुकस निकेटर :- भारत में, सिकंदर का उत्तराधिकारी।
- चन्द्रगुप्त मौर्य ने सेलुकस निकेटर को हराकर उसकी बेटी - क्रोनेलिया ( हेलना ) के साथ विवाह किया।
- चंद्रगुप्त मौर्य के समय यूनानी राजदूत - मेगस्थनीज भारत आये थे।
- IMP. :- मेगस्थनीज द्वारा रचित ग्रन्थ - ''इण्डिका'' ⤷ इण्डिका में - भारतीय समाज का वर्णन मिलता है ⤷ मेगस्थनीज के अनुसार - भारतीय समाज 7 भागो में विभक्त था।
- चन्द्रगुप्त मौर्य के समय - सुदर्शन झील ( गिरनार पर्वत -गुजरात ) का निर्माण गुजरात के स्थानीय राज्यपाल - पुसयगुप्त द्वारा करवाया गया।
- सुदर्शन झील का पहली बार पुर्नुद्वार / मरम्मत - शक शासक - रुद्रदामन द्वारा करवाई गई.
- तथा दूसरी बार - गप्त शासक - स्कन्द गुप्त द्वारा की गई।
- चन्द्रगुप्त मौर्य ने - भद्रबाहु नामक जैन मुनि से जैन धर्म की दीक्षा ग्रहण की।
- चन्द्रगुप्त मौर्य ने अपने जीवन के अंतिम दिन - '' श्रवणबेलगोला'' (मैसूर - कर्णाटक) में बीताये , जहाँ संथारा पूर्वक उनकी मृत्यु हो गई। ( संथारा का अर्थ- खाना -पीना छोड़ देना )
- IMP.- श्रवणबेलगोला में गोतमेश्वर की प्रतिमा है जो जैन धर्म से सम्बंधित है।
- ☆ सिकंदर के गुरु - अरस्तु थे।
- सिकंदर - मेसीडोनिया का था।
- चंद्र गुप्त का उत्तराधिकारी - बिन्दुसार
- बिन्दुसार को अमित्रघात ( सत्रु विनाशक ) , और अभिज्ञचेटस भी कहा जाता है
- बिन्दुसार के समय सिरया के राजदूत डायमेक्स भारत आये।
- बिन्दुसार ने आजीवक संप्रदाय ( बौद्ध धर्म से सम्बंधित ) को अपनाया था ।
- बिन्दुसार के उत्तराधिकारी - अशोक महान / अशोक वर्धन
- अशोक के पिता - बिन्दुसार
- अशोक के माता - शुभद्रांगी था।
- पुराणों में सम्राट अशोक को - अशोक वर्धन के नाम से सम्बोधित किया गया है।
- गुर्जरा व् मास्की अभिलेखों में '' अशोक '' नाम मिलता है।
- IMP. :- सम्राट अशोक द्वारा 261 ई. पू. में - कलिंग (उड़ीसा) पर आक्रमण किया गया।
- सम्राट अशोक ने उपगुप्त नामक बौद्ध भिक्षु से बौद्ध धर्म की दीक्षा ग्रहण की।
- सम्राट अशोक ने हमेशा के लिए युद्ध से हाय तोबा कर ली व् धम्म की स्थापना की।
- सम्राट अशोक ने लोगो का नैतिक उत्थान करने के लिए धम्म की स्थापना थी।
- धम्म के प्रचार -प्रसार के लिए - धम्ममहामंत अधिकारियो की नियुक्ति थी।
- सम्राट अशोक ने अपने पुत्र - महेंद्र व् पुत्री - संगमित्रा को बोद्ध धर्म का प्रचार प्रसार के लिए - श्री लंका में भेजा।
- सम्राट अशोक ने - श्री नगर को बसाया था।
- सम्राट अशोक ने - पाटलिपुत्र (पटना ) में '' तृत्य बौद्ध संगीति'' का आयोजन करवाया था।
- सम्राट अशोक ने अपने राज्य आदेशों को अभिलेखों के रूप में लिखवाया था।
- अभिलेख ⇾ शिलालेख -संख्या 14 , गुहालेख, स्तम्भ लेख।
- शिलालेखों की संख्या 14 मानी जाती है , 13 वे सिलालेख में कलिंग युद्ध का वर्णन मिलता है।
- अशोक के अभिलेखों को सर्वप्रथम खोजने वाला व्यक्ति - पाद्रेटी पंथेलेर था।
- सम्राट अशोक के अभिलेखों को पहली बार - जेम्स प्रिंसेप द्वारा पढ़ा गया।
- सम्राट अशोक के अभिलेख - ब्राह्मी (LEFT TO RIGHT) , खरोष्टी (R- L.), ग्रीक व् आरामाइक लिपियों में मिलते है।
- IMP. :- मौर्य वंश का अंतिम शासक - वृहद्रथ था , जिसकी हत्या उनके सेनापति - पुश्यमित्र शुंग द्वारा की गई।
- मौर्य काल में राजकीय भूमि को - सीता भूमि कहाँ जाता था।
- न्यायाधीशों को - राजूक कहा जाता था
- वेश्यावर्ती करने वाली को - रूपाजीवा कहलाती थी।
- सोने के सिक्के को - सुवर्ण कहाँ जाता था
- हिरण्य व् बलि नामक ''कर'' लोगो लोगो से वसूल किये जाते थे।
अध्याय 4 . - ब्राह्मण साम्राज्य :-
- शुंग वंश
- कण्व वंश
- सातवाहन वंश
1. शुंग वंश :-
- शुंग वंश का संस्थापक - पुश्यमित्र शुंग था।
- शुंग वंश का अंतिम शासक - देवभूति था, जिसकी हत्या वशुदेव द्वारा की गई।
2. कण्व वंश :-
- स्थापना - वशुदेव द्वारा की गई।
- कण्व वंश का अंतिम शासक - सुशर्मा था।
3. सातवाहन वंश :-
- संस्थापक - सिमुक था
- सातवाहन वंश के राजा अपने नाम के साथ - अपनी माताओ के नाम लिकते थे जैसे - गौतमी पुत्र शातकर्णि।
- सातवाहन का सबसे प्रतापी शासक - गौतमी पुत्र सातकर्णि था।
COMING SOON ..:- भारत के यवन साम्राजय एवं गुप्त काल ⤵️⤵️
- यूनानी
- शक
- कुषाण
- गुप्त काल

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