जय माँ सरस्वती
नमस्कार मित्रो,
में मनीष सोलंकी , दोस्तों में आपके लिए सम्पूर्ण भारत का इतिहास के महत्वपूर्ण G.K.(भाग - A ) लेकर आया हु!
भारत का इतिहास
- प्राचीन भारत का इतिहास
- मध्यकालीन भारत का इतिहास
- आधुनिक भारत का इतिहास
- संयुक्त राष्ट्र संघ
- विस्व इतिहास से सम्बन्धित प्रमुख घटनाये
(PART- 1)
प्राचीन भारत का इतिहास
सिंधुघाटी सभ्यता
- सिंधु घाटी सभ्यता का समय ( कार्बन -14 ) के अनुसार - 2350 -1750 ई।
- सिंधु घाटी सभ्यता सिंधु नदी व् उसकी सहायक नदियों के पास में हुुुई थी इसलिए इसे सिंधु घाटी सभ्यता कहते है।
- सिंधु घाटी सभ्यता का सर्व प्रथम खोजा गया स्थल '' हड़प्पा सभ्यता '' भी कहा जाता है।
उत्तर में - माढ़ा (J.&K.) से दक्षिण में दैमाबाद (महाराष्ट्र ) तथा पूर्व में आलमगीर (U P ) से पश्चिम में सुत्कांगेडूर (बलुचिस्थान ,पाकीस्थान ) तक।
- IMP. -
- सिंधु घाटी सभ्यता का खोजा गया पहला स्थान '' हड़प्पाा'' था जो वर्तमान में पकिस्तान में है।
- हड़प्पा के उत्खननकर्ता/ खोजकर्ता -दयाराम साहनी ने 1921 /22 में की।
- सिंधु घाटी /हड़प्पा सभ्यता में मिली सरंचनाओं/ स्थानों में सबसे बड़ी सरंचना - अन्नागार है।
- मोहन जोदड़ो - वर्तमान में पाकिस्तान में स्तिथ है जिसका शाब्दिक अर्थ -मृतको का टीला है।
⤷ मोहनजोदड़ो से पक्की इटे , सड़के, नालिया व् काँसिया की बानी हुई नर्तकी की मूर्ति प्राप्त हुई है।
- चुनहदडो - वर्तमान में पाकिस्तान में स्तिथ है, यहां से मनके (मोती) निर्माण के प्रमाण मिले है , ये मोती "जेस्सफॅर क्वार्ट्ज़ (लाल रंग) , चमकीले पत्थर आदि छोटे छोटे चमकीले पत्थरो से बनाये जाते है।
- सोर्तुघई - अफगानिस्तान में स्तिथ है।
- कालिबंघा - हनुमानगढ़ (राज.) में स्तिथ है।
⤷ कालीबंघा के उत्खननकर्ता - B.K. LAL ( BRAJ KUMAR LAL) AND B.K. THAPER ( BAL KRISNA THAAPER)
⤷ कालिबंघा में जुते हुए खेत के प्रमाण मिले है।
- बनावली - हरियाणा में स्तिथ।
- राखीगढ़ - हरियाणा में स्तिथ
- लोथल - गुजरात में स्तिथ।
⤷ लोथल से बंदरगाह (गोदीबाड़ा ) के प्रमाण मिले है।
- धोलावीरा - गुजरात में स्तिथ।
⤷ यहां से स्टेडियम मिला है।
井 सिंधुघाटी सभ्यता कांस्य युगीन सभ्यता थी।
⤷ यह सभ्यता शहरी सभ्यता थी।
⤷ सिंधु वासियो की लिपि - चित्रात्मक थी जिसे अभी तक पढ़ा नहीं जा सका।
⤷ सिंधु समाज मातृसतात्मक था।
⤷ सिंदुघाटी सभ्यता के लोग सर्वाहारी थे।
⤷ मेसापोटामिया (इराक) में मिला मेलुहा( मुहर ) सिंधुघाटी सभ्यता के लिए प्रयुक्त हुआ।
अध्याय 2 - वैदिक सभ्यता
(1500 ई.पू.- 600 ई.पू.)
वैदिक सभ्यता को 2 कालो में विभाजित किया है।
- ऋग्वेद सभ्यता -(1500 ई.पू. - 1000 ई.पू. तक )
- उत्तरवैदिक सभ्यता- (1000ई.पू.- 600 ई.पू. तक )
- आर्यो की भाषा संस्कृत थी।
- वैदिक सभ्यता ग्रामीण सभय्ता थी।
- वैदिक समाज वर्ण व्यवस्था में विभाजित था।
- ( वर्ण :- ब्राह्मण ,क्षत्रिय ,वेश्या , सूद्र ) में विभाजित था।
- वर्ण व्यवस्ता - ऋग्वेदिक कॉल में कर्म आधारित था , किन्तु उत्तर वैदिक काल में यह जन्म आधारित वंशानुगत हो गई।
⤷ आश्रम→ ब्रह्मचार्य आश्रम - जन्म से 25 वर्ष तक।
⤷ गृहस्थ आश्रम → 26 से 50 वर्ष तक।
⤷ वानप्रस्थ आश्रम - 51 से 95वर्ष तक.
⤷ सन्यास आश्रम - 96 से 100 वर्ष तक।- आर्यो का परिवार - पितृसत्तात्मक था।
- वेदो की संख्या - 4 है।
- वेद का अर्थ - ज्ञान है - ये विद धातु से बना है
- वेदो को अपौरुषय भी कहा जाता है।
1. ऋग्वेद :- ऋग्वेद की रचना ऋग्वेदिक काल में हुई थी , यह वेद सबसे प्राचीन , नसबसे बड़ा वेद है जिसमे देवताओ की स्मृतियों का उललेख है और यह प्रकति पर निर्भर थी।
प्रसिद्ध गायत्री मंत्र - ऋग्वेद से लिया गया है।
2. यजुर्वेद :- यह वेद गघ एवं पघ दोनों शैलियों में है , इसमें यज्ञो का उल्लेख किया गया हैं।
आर्यो द्वारा किये जाने वाले यज्ञ -
- राजसूर्य यज्ञ - राजा के राज्य अभिसेक के समय किया जाने वाला यज्ञ।
- अश्व मेघ यज्ञ - यह यज्ञ राजा अपने साम्राज्य के विस्तार के लिए करते थे।
- वाजपेय यज्ञ - गुड़ दौड़ प्रतियोगिता में विजय प्राप्त करने के लिए।
3. सामवेद :- सामवेद में आर्यो द्वारा गाई जाने वाली प्राथनाए एवं संगीत का उल्लेख मिलता है।
4. अथर्ववेद :- इस वेद की रचना - अथर्वा ऋषि ने की थी। इस वेद में आर्यो के दैनिक जीवन से जुडी बाते , रीती-रिवाज , अंधविस्वास जैसे - जादू टोना, टोटके,भूत प्रेत आदि का उल्लेख मिलता है। इस वेद में ओषधियों का उल्लेख भी मिलता है.
- वैदिक काल में षड्दर्शन (6) का विकास हुआ :-
दर्शन प्रणेता / प्रवर्तक
- सांख्य दर्शन → महर्षि कपिल- सबसे प्राचीन दर्शन
- न्याय दर्शन → महर्षि गौतम
- योग दर्शन → महर्षि पतंजलि
- वैशेषिक दर्शन → कणाद
- मीमांसा दर्शन → जेमिनी
- उत्तरी मीमांसा → बादरायण
- ☆ उपनिषदों की संख्या - 108 है
- मुण्डकोपनिषद :-भारत के राष्ट्रीय चिन्ह पर अंकित सत्यमेव जयते मुंडकोपनिषद से लिया गया है।
- पुराणों की संख्या - 18 मानी जाती है।
- मत्स्य पुराण सबसे प्रमुख पुराण है।
- ब्राह्मणो के द्वारा लिखे गए ग्रन्थ - शथपथ ग्रन्थ, ऐतरेय ग्रन्थ , तेतिरेय ग्रन्थ , मनुस्मृति, याज्ञवल्क्य स्मृति।
- वेदो के ज्ञान को समझने के लिए वेदांगो की रचना की जिनकी संख्या - 16 मानी जाती है।
- संस्कारो की संख्या - 16 है
COMING SOON ..:- महाजनपद काल ⤵️⤵️
- नन्द वंश
- मौर्य वंश
- गुप्त वंश
- ब्रह्मण साम्राज्य



