जय माँ सरस्वती
नमस्कार प्यारे दोस्तो,
में मनीष , दोस्तों में आज आपके लिए PART-1 प्राचीन भारत का इतिहास के महत्वपूर्ण G.K (भाग - C) लेके आया हु।
भारत के यवन साम्राज्य
- हिन्द -यूनानी
- शक
- कुषाण
हिन्द - यूनानी :-
- मिनाण्डर हिन्द यूनानियो का प्रशिद्ध शासक था।
- मिनाण्डर तथा बौद्ध भिक्षु - नागसेन के मध्य वार्ता हुई थी जिसका वर्णन - मिलिंदपान्हो में मिलता है।
- मिलिंदपान्हो एक बौद्ध ग्रन्थ है।
- हिन्द यूनानियो ने भारत में सोने के सिक्के भी जारी किये थे।
शक (शिथियन) :-
- शको में प्रतापी शासक - रुद्रदामन प्रथम हुए, जिन्होंने सुदर्शन झील का पुनुरुद्धार करवाया था।
- उज्जैन के स्थानीय राजाओ ने शको को पराजित करके विक्रमादित्य की उपाधि ग्रहण की व् विक्रम संवत की स्थापना की।
- NOTE :- विक्रम संवत की स्थापना - 57 ई. पू. - उज्जैन के राजाओ द्वारा।
कुषाण (यूची) :- मध्य चीन के जाती लोग
- भारत में कुषाण वंश का संस्थापक - कुजुल कदफिसेस था।
- कनिष्क द्वारा शक संवत की स्थापना की गई।
- शक संवत की स्थापना - 78 ई. पू की गई।
- कनिष्क द्वारा कश्मीर में चतुर्थ बौद्ध संगीति का आयोजन करवाया गया।
- बौद्ध धर्म की महायान शाखा/ संप्रदाय का विकास - कनिष्क के समय हुआ था।
- कनिष्क के राजवैध - चरक थे।
- चरक द्वारा रचित पुस्तक / ग्रंथ - चरक संहिता
- कनिष्क के दरबारी कवी - अश्वघोष थे।
- अश्वघोष द्वारा रचित ग्रन्थ - बुद्ध चरित्र व् सोदरा नन्द
- गांधार शैली व् मथुरा शैली का विकास - कनिष्क के समय हुआ था।
- कुषाणों के समय बहुत अधिक सोने के सिक्के जारी हुए थे।
गुप्त काल (240 ई. पू से 470 ई. पू)
गुप्त काल को भारतीय इतिहास का स्वर्ण काल माना जाता है।
श्री गुप्त :-
- गुप्त काल के प्रथम ज्ञात शासक - जो एक स्वतंत्र शासक न होकर एक सामंत हुआ करते थे।
- श्री गुप्त ने महाराजा की उपाधि ग्रहण की थी।
- महाराजा श्री गुप्त
घटोत्कच गुप्त :-
- घटोत्कच गुप्त ने भी महाराजा की उपाधि ग्रहण की थी।
- NOTE- दोस्तों में घटोत्कच की जानकारी नहीं बता पाया क्यू की इनके बारे में प्रतियोगी परीक्षा में नहीं पूछा जाता। दोस्तों में आपको वो ही जानकारी दूंगा जो 80 % प्रत्योगी परीक्षा में पूछा जाता है । अगर आप घटोत्कच के बारे ,में जानना चाहते है तो आप GOOGAL की सहायता ले सकते है ।
चन्द्रगुप्त प्रथम :-
- गुप्त काल के वास्तविक संस्थापक।
- चंद्र गुप्त प्रथम ने अपने राज्य रोहन के उपलक्ष में गुप्त संवत की स्थापना की - 319 ई. पू -320 ई. पू .
- चंद्र गुप्त प्रथम ने लिच्वि (जाती) की राजकुमारी - कुमार देवी साथ विवाह किया।
- चन्द्रगुप्त प्रथम ने महाराजा धीराज की उपाधि ग्रहण की।
समुन्द्र गुप्त :-
- चन्द्रगुप्त प्रथम के उत्तराधिकारी
- समुन्द्रगुप्त को भारत का नेपोलियन कहा जाता है
- इतिहासकार - वी. एस. स्मिथ ने समुन्द्रगुप्त को भारत का नेपोलियन कहा था।
- समुन्द्रगुप्त ने - 12 आर्यव्रत व् 9 दक्षिणावृत राजाओ को हराकर अपने पराक्रम का परिचय दिया था।
- समुन्द्रगुप्त का दरबारी कवी - हरिषेण था।
- हरिषेण द्वारा रचित ग्रन्थ - प्रयाग प्रसस्ति
- समुन्द्रगुप्त एक संगीत प्रेमी राजा था, जिन्होंने "अश्वमेघ यज्ञ" करवाया था।
- समुन्द्र गुप्त भगवान श्री विष्णु के उपासक थे।
चन्द्रगुप्त दृत्य :-
- समुन्द्रगुप्त के उत्तराधिकारी
- चन्द्रगुप्त दृत्य ने - विक्रमादित्य की उपाधि ग्रहण की थी ( चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य)
- गुप्त काल के सबसे प्रतापी शासक - चन्द्रगुप्त दृत्य
- चन्द्रगुप्त दृत्य की पुत्री - प्रभावती गुप्त थी।
- चन्द्रगुप्तविक्रमादित्य ने हूणों को हराकर चांदी के सिक्के जारी किये थे।
- चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के समय - चीनी यात्री - फाह्यान ने भारत की यात्रा की थी।
- फाह्यान की रचना - फा- को-की
- चन्द्रगुप्त दृत्य के दरबार में - कालिदास , आर्यभट्ट , वराहमिहिर, ब्रह्मगुप्त, बेतालभट्ट, वर रूचि जैसे विद्वान सोभा पाते थे।
कुमार गुप्त :-
- चंद्रगुत दृत्य के उत्तराधिकारी
- कुमार गुप्त द्वारा नालंदा विश्वविद्यालय का निर्माण करवया था।
- नालंदा विश्वविद्यालय (बिहार)
- NOTE- विक्रमशिला विश्वविद्यालय के निर्माण कर्ता - धर्मपाल (पाल वंश ) - बंगाल में।
स्कन्द गुप्त :-
- स्कन्द गुप्त ने - सुदर्शन झील का पुनरुद्वार करवाया।
- घोड़े की कूबड़ आकार के सिक्के चलाये।
भानुगुप्त :-
- एक कमजोर शासक था जो हूणों के आक्रमणों को नहीं रोक पायाथा।
IMPORTANT :-
1. कालिदास :-
- कालिदास जिन्हे भारत का सेक्सपीअर कहते है।
- कालिदास की कृतियाँ -→ रमेश कुमारी
- र - रघुवंशम
- में - मेघदुतम
- श - अभिज्ञान शाकुंतलम
- कु - कुमारसंभव
- माँ - मालविकाग्निमित्रम
- री - ऋतुसंहार
पुस्तक लेखक
मुद्राराक्षस - विशाखदत्तं
स्वप्नवासवदत्तम - भास्
आर्यभट्टीयम सिद्धांत - आर्यभट्ट
सूर्य सिद्धांत - आर्यभट्ट
पंचतत्र - विष्णु शर्मा
म्रचकतिकम - शूद्रक
वृहतसंहिता - वराहमिहिर
गुप्त कालीन मंदिर :-
- भूमरा का मंदिर - नागदा (M.P )
- तिगवा का मंदिर - ग्वालियर (म.प.)
- देवगढ़ का मंदिर - झांसी (U.P.)
- भीतर का मंदिर - कानपूर (U.P.)
IMP.
- बाघ की गुफाये - म.प. में है, जो गुप्तकालीन की देंन है।
- गुप्तकाल के व्यापारियों के प्रमुख को - श्रेष्ठि कहाँ जाता था।
- तथा व्यापारियों का संघठन - सार्थवाह के नाम से जाना जाता था।
- गुप्त काल में सोने के सिक्को को - दीनार
- चांदी के सिक्को को - रूप्यका
- वेश्यावर्ती में लिप्त महिलाओ को - गणिकाय खा जाता था।
- गुप्त काल में सामान्य सेनिको को - चाट एवं भात कहा जाता था।
- सेना के अधिकारियो को - दण्डपाशिक कहाँ जाता था।
वर्धन वंश (पुश्यभूति वंश )
- वर्धन वंश / पुश्यभूति वंश के संस्थापक - पुष्यभूति था।
- इनकी राजधानी - थानेश्वर (हरियाणा ) थी।
- प्रभाकर वर्धन - वर्धन वंश के राजा हुए थे , जिनके पुत्र -1 राज्य वर्धन 2. हर्षवर्धन थे।
हर्षवर्धन :- (606 ई. पू. से 647 ई. पू.)
- हर्षवर्धन को भारत का अंतिम हिन्दू सम्राट कहा जाता है।
- हर्षवर्धन ने - पदमभट्टारकी की उपाधि ग्रहण की थी।
- हर्षवर्धन के समय पंचम बौद्ध संगीति का आयोजन हुआ था।
- हर्षवर्धन द्वारा प्रयाग में आयोजित किये जाने वाला धार्मिक आयोजन जहा हर्षवर्धन द्वारा - गरीबो व् ब्राह्मणो को दान दिया जाता था।
- हर्षवर्धन का राजकवि - बाणभट्ट था
- बाणभट्ट की रचनाये - कादम्बरी तथा हर्षचरित्र
- हर्षवर्धन की रचनाये -नागानंद , रत्नावली व् प्रियदर्शिका।
- चीनी यात्री - हेन -त्सांग (हेनसांग) - हर्षवर्धन के समय भारत आये थे।
- हेनसांग को यात्रियों का राजकुमार कहा है।
- हेनसांग की रचना - सी - यू - की
प्रमुख बौद्ध संगीति
- आजाद सत्रु - राजगृह में
- कालाशोक - वैशाली
- अशोक - पाटलिपुत्र
- कनिष्क - कश्मीर में
- हर्षवर्धन - प्रयाग
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- विश्व की प्रमुख घटनाये
- विश्व इतिहास से सम्बंधित प्रमुख घटनाये
